Wednesday, June 1, 2011

संपर्क सूत्र और बाजार का डर

          आज जब मैं अभय जी के ब्लॉग पर चरने गया गया तो अचानक साईड में पड़े उनके प्रोफाईल वाले ब्लॉगर गैजिट पर नज़र पड़ गयी और मेरे किसी न्यूरोन का विद्युत् प्रवाह बढ़ गया | एक छोटी सी समस्या नज़र आई जो मैं पहले भी देख चुका हूँ और अन्य कई ब्लॉगर बंधुओं के ब्लॉग पर देखा है | इंगित डर के मारे कभी इसलिए नहीं किया बहुत पहले ये सीख लिया था कि बिल्ला बात ज्ञान दोगे तो झापड़ पड़ेगा खासकर तकनीकी विषय पर बताने पर | भैया हम सब ज्ञानी हैं हमें मत सीखाओ | दूसरा कारण ये भी था कि मुझे कभी ये जिक्र करने लायक जैसा विषय लगा भी नहीं | लेकिन अब कई जगह पर देखने के बाद मुझमे ये आत्मविश्वास आया कि चलो इसके ऊपर एक छोटी पोस्ट कर ही देनी चाहिए और २ साल से सुस्त बड़े ब्लॉग पर एक पोस्ट बढाई जाए और जिन मित्रों को जानकारी न हो वो इस २ मिनट के ताम-झाम को समझकर अमल में ला सकें | तकनीकी जानकार तो इसे जानते ही हैं पर भैया जो नहीं जानते ये पोस्ट उनके लिए है | ;-)

          तो अब समस्या बता ही दूँ, समस्या ईमेल सूत्र की है | बहुत से मित्रों को स्पैम मेल के कूड़े साफ़ करते-२ ये तो पता चल गया की इन्टरनेट पर सर्च इंजन की तरह ईमेल क्रॉलर प्रोग्राम चलते हैं जो मेल पतों का शिकार करते हैं सो उन्होंने अपने ईमेल पतों को नयी तर्ज़ पर परिवर्तन करते हुए लिखना शुरू कर दिया |

मसलन,
          मैं आपको बता दूँ अगर आप स्वचालित प्रोग्राम सर्च से बचने के लिए ऐसा लिख रहे हैं तो आपका ये प्रयोग अब नाकाफी है | क्योंकि आजकल के प्रोग्राम इतना दिमाग रखते हैं कि at को @ कैसे पढ़ा जाए और dot को . (period) कैसे पढ़ा जाए | या आप कितने ही तरीकों से इसे घुमा फिरा कर लिख दें ये जब तक टेक्स्चुअल फॉर्म में है तब तक कृत्रिम प्रोग्रामों के शिकार से बच नहीं सकता | फिलहाल तक के लिए इसका सीधा और सरल उपाय यही है कि आप ईमेल को या अन्य कोई भी पाठ्य जिसे सर्च से बचाना चाहते हैं उसे इमेज रूप में बनाकर अपने पोर्टल पर रखें |

जैसे, ऊपर वाले दोनों मेल पतों को इस प्रकार इमेज बनाकर रखा जा सकता है |


          जहाँ तक मानव द्वारा पढ़े जाने का डर है तो सीधी सी बात है मेल पता दिया ही ना जाए पर अगर देना ही है तो पहले वाली पद्धति की अपेक्षा इमेज पद्धति अपनाना बेहतर है |

- इसका साफ़ फायदा ये तो है ही कि स्पैम से काफी हद तक मुक्ति | फिलवक्त तो ऐसे प्रोग्राम नहीं हैं जो इन्हें रीड कर सकें | वेब पोर्टल्स पर फॉर्म रजिस्ट्रेशन के अंत में भरवाए जाने वाले कपाचा या इमेज वेरिफिकेशन कोड तो आपने कई बार भरे होंगे वो इमेज रूप में इसीलिए होते है ताकि स्वचालित प्रोग्राम से रजिस्ट्रेशन की सम्भावना को ख़त्म किया जा सके |


- दूसरा फायदा ये हैं की ईमेल पता भी एकदम उसी रूप में लिखा जा सकता है जैसा आपका है, बजाय @ को at लिखने के या अन्य वर्णों को अन्य तरीकों से लिखने के, इससे गलत इन्टरप्रेट किये जाने की सम्भावना भी समाप्त हो जाती है |


- तीसरा आप इमेज में मनचाहे रंग और फॉण्ट का प्रयोग भी कर सकते हैं, मनचाहे साईज में सेट कर सकते हैं   और ख़ास तरीके से कोंट्राष्ट किये जाने योग्य बना सकते हैं |

          तो अपना मेल इमेज बना कर डालें ज्यादा फायदा मिलेगा | मालिकाना वेब पोर्टल पर तो खैर इमेज कहीं भी डाली जा सकती है | ब्लॉगर में इसे डालने के लिए आप Add Gadget में Basic गैजिट श्रृखला के Picture गैजिट का प्रयोग कर सकते हैं | इसके अलवा आप फेसबुक बैज नामक गैजिट का प्रयोग भी कर सकते हैं, जो मेरे ब्लॉग में आप सबसे ऊपर दायें कोने में  देख सकते हैं, फेसबुक बैज भी इमेज रूप में ही प्रदर्शित होता है, कारण इसका ऊपर बता ही चुका हूँ |

          क्रिया की प्रतिक्रिया हुयी तो (मतलब दिमाग की नस ने फिर फाड़फाड़ना शुरू किया तो) कोशिश करूँगा आगे भी तकनीकी समस्याओं से जुड़े पोस्ट डाल सकूँ और मित्रों से कुछ साझा कर सकूँ |

5 comments:

  1. ham to khair apne e-mail pate ko kahin dene se darte nahin .

    fir bhi praveentrivedi009@g.mail.com aapko diye hee de rahe hain.
    :)

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  2. thanks yogendra bhai... I will do it as suggested by you...

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  3. हटा ऽऽऽऽऽ दियो ऽऽऽऽ है ऽऽऽऽऽ भाई ऽऽऽऽऽ जी ऽऽऽऽऽऽ |
    मुझे तो इसके बारे में पता ही नहीं था, दरअसल ब्लॉग बनाने के बाद कभी ज्यादा पोस्ट की नहीं और किसी कमेन्ट बाज़ ने ये बताया भी नहीं | (कोड वेरिफिकेशन सन्दर्भ में)

    भयंकर चेतावनी : मेरी उम्र सिर्फ 25 साल ही तो है, उम्र में मुझसे बड़े चिट्ठाकार कृपया मुझे सीधे योगेन्द्र नाम से पुकारें, बड़ा प्यारा लगता है | ;-)

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  4. परम प्रिय आदरणीय योगेन्द्र जी भाई !
    आपकी चिर युवा दिखने की यह भोली कोशिश कामयाब नहीं होने दी जायेगी|
    भले ही हमरी उम्र आपसे १० साल ज्यादा हो ....तब भी !

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